
बस्ती: जिला बदर व्यक्ति का आरोप, कहा- पुलिस के डर से खौफ में मेरा परिवार
बस्ती: रखौना चौकी के सिपाहियों की मनमानी, जिला बदर के घर जाकर परिजनों को दे रहे धमकी; कानून का पालन करने पर भी प्रताड़ना, निर्दोष परिजनों के उत्पीड़न पर मचा हड़कंप
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: जिला बदर व्यक्ति के परिवार को पुलिस का ‘डर’, चौकी के सिपाहियों पर लगा उत्पीड़न का गंभीर आरोप
- न्याय का पालन कर रहा हूं, फिर क्यों प्रताड़ित कर रहे सिपाही? ADG से लगाई गुहार
- पुलिस पर लगा परिवार को प्रताड़ित करने का आरोप, जिला बदर व्यक्ति ने मांगी सुरक्षा
बस्ती: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। लालगंज थाना क्षेत्र के ग्राम तिघरा निवासी धर्मेश अग्निहोत्री, पुत्र श्री केशराम, ने गोरखपुर जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) को भेजे गए एक शिकायती प्रार्थना पत्र के माध्यम से स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

कानूनी आदेश का पालन, फिर भी प्रताड़ना का दंश
पीड़ित धर्मेश अग्निहोत्री के अनुसार, उन्हें न्यायिक अपर मजिस्ट्रेट के आदेशानुसार 6 महीने के लिए जिला बदर किया गया है। वे कानून का पूर्ण सम्मान करते हुए वर्तमान में बस्ती जिले की सीमा से बाहर रह रहे हैं। बावजूद इसके, उनके घर पर स्थानीय रखौना चौकी के दो नवनियुक्त सिपाहियों का आना-जाना बना रहता है। पीड़ित का आरोप है कि उनकी अनुपस्थिति में ये पुलिसकर्मी उनके परिवार को निशाना बना रहे हैं।
“परिवार है खौफ में”
धर्मेश ने अपने पत्र में विस्तार से बताया है कि उक्त दोनों सिपाही नियमित रूप से उनके घर (ग्राम तिघरा) पहुंचते हैं और उनके परिजनों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं।
- सिपाहियों पर घर के दरवाजे पर चढ़कर गाली-गलौज करने का आरोप है।
- पीड़ित के परिवार के सदस्यों को जानबूझकर डराया-धमकाया जा रहा है, जिससे वे मानसिक प्रताड़ना के शिकार हो रहे हैं।
- इस अनियंत्रित व्यवहार के कारण धर्मेश का पूरा परिवार इस समय भारी दहशत और भय के साये में जीने को मजबूर है।
उच्च अधिकारियों से लगाई गुहार
धर्मेश अग्निहोत्री ने अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा है कि वे स्वयं कानून का पालन करते हुए जिला बदर की अवधि बाहर रहकर काट रहे हैं, लेकिन उनके निर्दोष परिवार को इस तरह प्रताड़ित और अपमानित करना पूरी तरह से अनुचित और अन्यायपूर्ण है।
पीड़ित ने ADG गोरखपुर से मांग की है कि इस पूरे मामले को संज्ञान में लिया जाए। उन्होंने दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष और सख्त विभागीय जांच कराने की प्रार्थना की है, ताकि उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और उन्हें इस अकारण मिल रही मानसिक प्रताड़ना से राहत मिल सके।
फिलहाल, इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।














